1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

स्थिति में ही विद्रोह किया।’’ फांसी का दंड दिए जाने पर जिसके हाथों में भारी-भारी हथकड़ियां हैं, शरीर पर हुए घावों से जिसके वस्त्र रक्त से सने हैं और मरण की भ्यानकता को अपनी मुद्रा के वीर हास्य से जो धिक्कार रहा है, ऐसा पीर अली फांसी के फंदे के सामने खड़ा है। अपने प्रिय पुत्र का नाम लेते ही उसक कंठ भर आया। इतने में अंगे्रज अधिकारियों ने पूछा, ‘‘शांत दृष्टि से उन अंगे्रजों की ओर घूमकर वह बड़े धैर्य से बोला,


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स्थिति में ही विद्रोह किया।’’ फांसी का दंड दिए जाने पर जिसके हाथों में भारी-भारी हथकड़ियां हैं, शरीर पर हुए घावों से जिसके वस्त्र रक्त से सने हैं और मरण की भ्यानकता को अपनी मुद्रा के वीर हास्य से जो धिक्कार रहा है, ऐसा पीर अली फांसी के फंदे के सामने खड़ा है। अपने प्रिय पुत्र का नाम लेते ही उसक कंठ भर आया। इतने में अंगे्रज अधिकारियों ने पूछा, ‘‘शांत दृष्टि से उन अंगे्रजों की ओर घूमकर वह बड़े धैर्य से बोला,


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