भी नहीं। उसकी मृत्यु का समाचार सुनते ही अति राजनिष्ठ गिनी जानेवाली दानापुर की नेटिव सेना 25 जुलाई को विद्रोह कर उठी। दानापुर का यूरोपियन तोपखाना और गोरी रेजिमेंट होते हुए भी तीन नेटिव रेजिमेंटो ंने अपने शस्त्रास्त्र और कंपनी के यूनीफाॅर्म तिरस्कार से फेंककर शोण नदी की आरे प्रस्थान किया। उस स्थान का मुख्य अधिकारी मेजर जनरल लाॅयड भयग्रस्त और बूढ़ा था, इसलिए उन सिपाहियों का तुरंत पीछा करने की उसकी हिम्मत
भी नहीं। उसकी मृत्यु का समाचार सुनते ही अति राजनिष्ठ गिनी जानेवाली दानापुर की नेटिव सेना 25 जुलाई को विद्रोह कर उठी। दानापुर का यूरोपियन तोपखाना और गोरी रेजिमेंट होते हुए भी तीन नेटिव रेजिमेंटो ंने अपने शस्त्रास्त्र और कंपनी के यूनीफाॅर्म तिरस्कार से फेंककर शोण नदी की आरे प्रस्थान किया। उस स्थान का मुख्य अधिकारी मेजर जनरल लाॅयड भयग्रस्त और बूढ़ा था, इसलिए उन सिपाहियों का तुरंत पीछा करने की उसकी हिम्मत