1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

एक कमी के कारण आज तक स्वतंत्रता के सिपाहियों और लोगों के सारे परिश्रम विफल हो रहे थे, वह धुरंधरत्व की न्यूवता इस शाहाबाद जिले में जगदीशपुर के महल ने शेष नहीं रहने दी थी और इसीलिए उस जगदीशपुर के हिंदू राजा के ध्वज की ओर शोण नदी उतरकर ये सिपाही दौड़ते जा रहे थे; क्योंकि स्वराज्य संग्राम के लिए सुयोग्य एक नेता उन सैनिकों को अंत में जगदीशपुर मंे ही मिलनेवाला था। राजपूत वंश की खान से ही जिस स्वतंत्रताप्रिय


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एक कमी के कारण आज तक स्वतंत्रता के सिपाहियों और लोगों के सारे परिश्रम विफल हो रहे थे, वह धुरंधरत्व की न्यूवता इस शाहाबाद जिले में जगदीशपुर के महल ने शेष नहीं रहने दी थी और इसीलिए उस जगदीशपुर के हिंदू राजा के ध्वज की ओर शोण नदी उतरकर ये सिपाही दौड़ते जा रहे थे; क्योंकि स्वराज्य संग्राम के लिए सुयोग्य एक नेता उन सैनिकों को अंत में जगदीशपुर मंे ही मिलनेवाला था। राजपूत वंश की खान से ही जिस स्वतंत्रताप्रिय


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