नेता का जन्म हुआ उसका नाम कुंवर सिंह था। शाहाबाद तहसील की विस्तीर्ण भूमि का स्वामित्व इस कुंवर सिंह के उदार चरित्र वंश में सुप्रतिष्ठित हुआ था और उस राजवंश ।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 264
पर वहां के जन-समूह की निसर्ग स्फुरित प्रीति थी। बड़े-बड़े बादशाहों के तूफान हिंदुस्थान की राजनीित के समुद्र में उठे और इस प्रदेश के ऊपर से भी घन गर्जना करते जा-आ रहे थे तब भी परम कारूणिक राजपूत राजछत्र के नीचे
नेता का जन्म हुआ उसका नाम कुंवर सिंह था। शाहाबाद तहसील की विस्तीर्ण भूमि का स्वामित्व इस कुंवर सिंह के उदार चरित्र वंश में सुप्रतिष्ठित हुआ था और उस राजवंश ।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 264
पर वहां के जन-समूह की निसर्ग स्फुरित प्रीति थी। बड़े-बड़े बादशाहों के तूफान हिंदुस्थान की राजनीित के समुद्र में उठे और इस प्रदेश के ऊपर से भी घन गर्जना करते जा-आ रहे थे तब भी परम कारूणिक राजपूत राजछत्र के नीचे