1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लगे-यही कुंवर सिंह के कुलोपाध्याय शुचिव्रत ब्राह्यमण उपदेश करने लगे। ऐसा ही उसकी तैयार तलवार भी कहने लगी। पटना शहर हाथी पर बैठकर जाना भी जिसे अस्वस्थता के कारण असंभव, वह अस्सी वर्ष का राजपूत कुंवर सिंह तड़ाक से उठा और रूग्ण शय्या पर से वह जो उठा तो एकदम रणक्षेत्र में ही जाकर रूका।

शाहाबाद जिले के मुख्यालय ‘आरा’ शहर में जगदीशपुर से निकले सिपाही दौड़ते गए और उन्होंने वहां का अंगे्रजी खजाना, झंडा, कारावास,


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लगे-यही कुंवर सिंह के कुलोपाध्याय शुचिव्रत ब्राह्यमण उपदेश करने लगे। ऐसा ही उसकी तैयार तलवार भी कहने लगी। पटना शहर हाथी पर बैठकर जाना भी जिसे अस्वस्थता के कारण असंभव, वह अस्सी वर्ष का राजपूत कुंवर सिंह तड़ाक से उठा और रूग्ण शय्या पर से वह जो उठा तो एकदम रणक्षेत्र में ही जाकर रूका।

शाहाबाद जिले के मुख्यालय ‘आरा’ शहर में जगदीशपुर से निकले सिपाही दौड़ते गए और उन्होंने वहां का अंगे्रजी खजाना, झंडा, कारावास,


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