1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar




1857 का स्वातंत्र्य समर - 267

आरा शहर के तीर को उस सेना ने स्पर्श किया। शुक्ल पक्ष का मनोहर शशि बिंब उस भूमि की विजयी सेना के विजयोत्साह का हिससेदार बनने के लिए आकाश से उनके साथ चलने लगा। कैप्टन डनबार, इस सफेद चांदनी में अपनी सेना का व्यूह समय पर उŸाम रच ले! क्योंकि आगे चांदनी होगी या कालिमा, इसका कोई भरोसा नहीं। इस व्यूह में हमेशा की तरह ये राजनिष्ठ सिख ही हैं-ऐसा मानकर वे पहली पंक्तियों में


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1857 का स्वातंत्र्य समर - 267

आरा शहर के तीर को उस सेना ने स्पर्श किया। शुक्ल पक्ष का मनोहर शशि बिंब उस भूमि की विजयी सेना के विजयोत्साह का हिससेदार बनने के लिए आकाश से उनके साथ चलने लगा। कैप्टन डनबार, इस सफेद चांदनी में अपनी सेना का व्यूह समय पर उŸाम रच ले! क्योंकि आगे चांदनी होगी या कालिमा, इसका कोई भरोसा नहीं। इस व्यूह में हमेशा की तरह ये राजनिष्ठ सिख ही हैं-ऐसा मानकर वे पहली पंक्तियों में


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