1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

खड़े रहने को तैयार ही हैं। आरा के घने जंगल में ले जानेवाला वह काला पथ-प्रदर्शक कहां है? उसे आगे करो और चलो। विजयी सैनिकों, रणांगण के लिए उत्सुक अपनी तलवारें इस चांदनी में चमकाते आगे बढ़ो। पेड़ के बाद पेड़ चला, जमीन के पीछे जमीन छूटने लगी। और यह आरा शहर का पुल भी आ गया। पर यह क्या? शत्रु कहां है? अभी तो एक भी पांडे अपनी प्यासी तलवार को तो छोड़ो दीर्घ दृष्टि बंदूक को भी दीख रहा, यह कैसे हुआ? भाग गए डरपोक! डनबार आ रहा है,


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खड़े रहने को तैयार ही हैं। आरा के घने जंगल में ले जानेवाला वह काला पथ-प्रदर्शक कहां है? उसे आगे करो और चलो। विजयी सैनिकों, रणांगण के लिए उत्सुक अपनी तलवारें इस चांदनी में चमकाते आगे बढ़ो। पेड़ के बाद पेड़ चला, जमीन के पीछे जमीन छूटने लगी। और यह आरा शहर का पुल भी आ गया। पर यह क्या? शत्रु कहां है? अभी तो एक भी पांडे अपनी प्यासी तलवार को तो छोड़ो दीर्घ दृष्टि बंदूक को भी दीख रहा, यह कैसे हुआ? भाग गए डरपोक! डनबार आ रहा है,


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