1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उनकी वरदी काली और रात काली और रात काली! सारे काले वस्त्रों के एक दिल हो जाने से सिखों के काले-दोनों पैर रणक्षेत्र से भाग खड़े हुए। उनका कमांडर डनबार पहले झटके में ही मारा गया था। अपने प्राण बचा भागते वह अंगे्रजी सेना एक गांव में आ पड़ी। वहां कुछ देर छिपकर बैठने का प्रयास कर भोर होते ही उस घनघोर रात में राणक्षेत्र में मरे हुए ही नहीं, अपने घायल बंधुओं को वहीं छोडऋ अपने कमांडर का शव भी वैसे ही छोड़कर वे भूखे,


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उनकी वरदी काली और रात काली और रात काली! सारे काले वस्त्रों के एक दिल हो जाने से सिखों के काले-दोनों पैर रणक्षेत्र से भाग खड़े हुए। उनका कमांडर डनबार पहले झटके में ही मारा गया था। अपने प्राण बचा भागते वह अंगे्रजी सेना एक गांव में आ पड़ी। वहां कुछ देर छिपकर बैठने का प्रयास कर भोर होते ही उस घनघोर रात में राणक्षेत्र में मरे हुए ही नहीं, अपने घायल बंधुओं को वहीं छोडऋ अपने कमांडर का शव भी वैसे ही छोड़कर वे भूखे,


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