1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जो मिलीं, जो मिलीं वे रेत में धंस गईं, जो रेत में नहीं धंसी उन्हें पांडे लोगों ने जला दिया । एक-दो नौकाएं शेष रहीं। आरा का घेरा तोड़कर वहां के बहादुर लोगों सहित विजय गीत गाती अपनी सेना लौटी होगी, इसलिए दानापुर के अंगे्रज नर-नारी नदी किनारे पहुंचे तो उन्हें नौकाओं से एक भी उŸोजक हंसी सुनाई नहीं दी। झंडा नहीं, बैंड नहीं, कोई ऊपर सिर उठाए नहीं, सबका सीना धड़धड़ाने लगा। मेरा पुत्र, मेरा भाई, मेरा बाप, मेरा


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जो मिलीं, जो मिलीं वे रेत में धंस गईं, जो रेत में नहीं धंसी उन्हें पांडे लोगों ने जला दिया । एक-दो नौकाएं शेष रहीं। आरा का घेरा तोड़कर वहां के बहादुर लोगों सहित विजय गीत गाती अपनी सेना लौटी होगी, इसलिए दानापुर के अंगे्रज नर-नारी नदी किनारे पहुंचे तो उन्हें नौकाओं से एक भी उŸोजक हंसी सुनाई नहीं दी। झंडा नहीं, बैंड नहीं, कोई ऊपर सिर उठाए नहीं, सबका सीना धड़धड़ाने लगा। मेरा पुत्र, मेरा भाई, मेरा बाप, मेरा


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