सिपाही अंगेजों के बैनेट के हमले के आगे खड़े रहने का जाने क्यों कभी साहस नहीं करते थे और यहां भी वे हिम्मत हार गए। आयर उन्हें उस झाड़ी में से बाहर निकाल आगे घुसा और आरा की गढ़ी की ओर बढ़ गया। वहां बंद अंगे्रजी सेना को उसने मुक्त किया और इस तरह आरा शहर फिर से अंगे्रजों के हाथ आ गया।
आरा शहर का घेरा कोई आठ दि नही चला था। उन आठ दिनों में यह घेरा संभालते जगदीशपुर के उस शूर पररावार नहीं था तब भी उसके बाजारू
सिपाही अंगेजों के बैनेट के हमले के आगे खड़े रहने का जाने क्यों कभी साहस नहीं करते थे और यहां भी वे हिम्मत हार गए। आयर उन्हें उस झाड़ी में से बाहर निकाल आगे घुसा और आरा की गढ़ी की ओर बढ़ गया। वहां बंद अंगे्रजी सेना को उसने मुक्त किया और इस तरह आरा शहर फिर से अंगे्रजों के हाथ आ गया।
आरा शहर का घेरा कोई आठ दि नही चला था। उन आठ दिनों में यह घेरा संभालते जगदीशपुर के उस शूर पररावार नहीं था तब भी उसके बाजारू