1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सिपाही अंगेजों के बैनेट के हमले के आगे खड़े रहने का जाने क्यों कभी साहस नहीं करते थे और यहां भी वे हिम्मत हार गए। आयर उन्हें उस झाड़ी में से बाहर निकाल आगे घुसा और आरा की गढ़ी की ओर बढ़ गया। वहां बंद अंगे्रजी सेना को उसने मुक्त किया और इस तरह आरा शहर फिर से अंगे्रजों के हाथ आ गया।

आरा शहर का घेरा कोई आठ दि नही चला था। उन आठ दिनों में यह घेरा संभालते जगदीशपुर के उस शूर पररावार नहीं था तब भी उसके बाजारू


1300 of 2102

सिपाही अंगेजों के बैनेट के हमले के आगे खड़े रहने का जाने क्यों कभी साहस नहीं करते थे और यहां भी वे हिम्मत हार गए। आयर उन्हें उस झाड़ी में से बाहर निकाल आगे घुसा और आरा की गढ़ी की ओर बढ़ गया। वहां बंद अंगे्रजी सेना को उसने मुक्त किया और इस तरह आरा शहर फिर से अंगे्रजों के हाथ आ गया।

आरा शहर का घेरा कोई आठ दि नही चला था। उन आठ दिनों में यह घेरा संभालते जगदीशपुर के उस शूर पररावार नहीं था तब भी उसके बाजारू


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