एक दिलवाले और विजय से सबल हुए शत्रु से राजधानी के एक शहर के पास खुली लड़ाई लड़कर सारी हानि न
1857 का स्वातंत्र्य समर - 270
करके छापामार लड़ाई करने के विचार से अंगे्रजी सेना से दो अच्छी भिड़त हो जाने पर कुंवर सिंह जगदीशपुर के बाहर निकला और 14 अगस्त को आयर कुंवर सिंह के महल में तंबू गाड़कर बैठा।
इस तरह जगदीशपुर यद्यपि अंगे्रजों के कब्जे में आ गया, उन्होंने जगदीशपुर के राजमहल, हिंदू मंदिरों और भवनों का नाश किया तो भी उस महल का राजा,
एक दिलवाले और विजय से सबल हुए शत्रु से राजधानी के एक शहर के पास खुली लड़ाई लड़कर सारी हानि न
1857 का स्वातंत्र्य समर - 270
करके छापामार लड़ाई करने के विचार से अंगे्रजी सेना से दो अच्छी भिड़त हो जाने पर कुंवर सिंह जगदीशपुर के बाहर निकला और 14 अगस्त को आयर कुंवर सिंह के महल में तंबू गाड़कर बैठा।
इस तरह जगदीशपुर यद्यपि अंगे्रजों के कब्जे में आ गया, उन्होंने जगदीशपुर के राजमहल, हिंदू मंदिरों और भवनों का नाश किया तो भी उस महल का राजा,