बादल जैसा ही बिखराव उनमें बना हुआ था। ऐसी स्थिति में उन्हें एक कर्णधार चाहिए था।
उन्होंने जिसे मुखिया माना था वह वृद्ध बादशाह भी किसी एक कर्णधार के लिए उन हजारों सिपाहियों जितना ही उतावला था। उसने बख्तर खान को सारे अधिकार देकर देखे। फिर उसने तीन जनरल नियुक्त कर उनके हाथों में नेतत्व देकर देखा। फिर दिल्ली के तीन नागरिक और सिपाहियों के तीन प्रतिनिधि ऐसे छह लोगों का प्रतिनिधिमंडल सारी कार्यवाही संगठित रीति और एकमत से करे,
बादल जैसा ही बिखराव उनमें बना हुआ था। ऐसी स्थिति में उन्हें एक कर्णधार चाहिए था।
उन्होंने जिसे मुखिया माना था वह वृद्ध बादशाह भी किसी एक कर्णधार के लिए उन हजारों सिपाहियों जितना ही उतावला था। उसने बख्तर खान को सारे अधिकार देकर देखे। फिर उसने तीन जनरल नियुक्त कर उनके हाथों में नेतत्व देकर देखा। फिर दिल्ली के तीन नागरिक और सिपाहियों के तीन प्रतिनिधि ऐसे छह लोगों का प्रतिनिधिमंडल सारी कार्यवाही संगठित रीति और एकमत से करे,