1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

स्वदेश को स्वतंत्रता प्राप्त करा देनेवाला कोई भी स्वदेशी अधिपति आगे आए तो मुझे सौ गुना अधिक आनंद होगा, ऐसा उस वृद्ध मुगल ने सबको सूचित किया और अपने हस्ताक्षरों से जयपुर, अलवर, जोधपुर, बीकानेर आदि प्रमुख राज्यें को पत्र लिखे


1857 का स्वातंत्र्य समर - 274

कि ‘‘अंगे्रजों की बेड़ियों के टुकड़े देखना और किसी भी तरह हिंदुस्थान स्वतंत्र हो, यह मेरी तीव्र इच्छा है। परंतु इस आपात स्थिति में जो सारे देश को नेतृत्व देने में समर्थ हो,


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स्वदेश को स्वतंत्रता प्राप्त करा देनेवाला कोई भी स्वदेशी अधिपति आगे आए तो मुझे सौ गुना अधिक आनंद होगा, ऐसा उस वृद्ध मुगल ने सबको सूचित किया और अपने हस्ताक्षरों से जयपुर, अलवर, जोधपुर, बीकानेर आदि प्रमुख राज्यें को पत्र लिखे


1857 का स्वातंत्र्य समर - 274

कि ‘‘अंगे्रजों की बेड़ियों के टुकड़े देखना और किसी भी तरह हिंदुस्थान स्वतंत्र हो, यह मेरी तीव्र इच्छा है। परंतु इस आपात स्थिति में जो सारे देश को नेतृत्व देने में समर्थ हो,


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