राष्ट्रीय शक्ति को जो संगठित कर सके और जिसमें सारा राष्ट्र एकमत हो सके, ऐसा कोई एक धुरंधर कर्णधार सामने आए बिना यह राज्य क्रांति सफल होनेवाली नहीं। हिंदुस्थान को अंगे्रजों की गुलामी से स्वतंत्र कर उस पर मेरा ही अधिराज्य स्थापित हो, यह मेरी व्यक्ति विषयक महŸवकांक्षा शेष नहीं है। स्वदेश की स्वतंत्रता के कार्य में तलवार से सज्जित होकर अंगे्रजों को सीमा पार करने के लिए आप सब राजा तैयार हों तो हिंदुस्थान
राष्ट्रीय शक्ति को जो संगठित कर सके और जिसमें सारा राष्ट्र एकमत हो सके, ऐसा कोई एक धुरंधर कर्णधार सामने आए बिना यह राज्य क्रांति सफल होनेवाली नहीं। हिंदुस्थान को अंगे्रजों की गुलामी से स्वतंत्र कर उस पर मेरा ही अधिराज्य स्थापित हो, यह मेरी व्यक्ति विषयक महŸवकांक्षा शेष नहीं है। स्वदेश की स्वतंत्रता के कार्य में तलवार से सज्जित होकर अंगे्रजों को सीमा पार करने के लिए आप सब राजा तैयार हों तो हिंदुस्थान