1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ऐसे वे तत्त्व कौन से थे?

सन् 1857 की क्रांति के प्रधान कारण जो दिव्य तत्त्व थे-स्वधर्म व स्वराज्य। अपने प्राणप्रिय धर्म पर भयंकर, विघातक एवं कपटपूर्ण हमला हुआ है, यह यथार्थ दिखते ही स्वधर्म-रक्षणार्थ जो ‘दीन-दीन’ की गर्जना शुरू हुई उस गर्जना में और अपनी प्रकृति दत्त स्वतंत्रता के कपटपूर्ण छीने जाने पर और अपने पैरों में पड़ी राजनीतिक गुलामी की जंजीरें देखते ही स्वराज्य प्राप्त करने की पवित्र इच्छा


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ऐसे वे तत्त्व कौन से थे?

सन् 1857 की क्रांति के प्रधान कारण जो दिव्य तत्त्व थे-स्वधर्म व स्वराज्य। अपने प्राणप्रिय धर्म पर भयंकर, विघातक एवं कपटपूर्ण हमला हुआ है, यह यथार्थ दिखते ही स्वधर्म-रक्षणार्थ जो ‘दीन-दीन’ की गर्जना शुरू हुई उस गर्जना में और अपनी प्रकृति दत्त स्वतंत्रता के कपटपूर्ण छीने जाने पर और अपने पैरों में पड़ी राजनीतिक गुलामी की जंजीरें देखते ही स्वराज्य प्राप्त करने की पवित्र इच्छा


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