मुंह फेरा और तीन गोलियों से उसने उन तीनों शहजादों का मार डाला। तैमूर के वंशवृक्ष की वे अंतिम पŸिायां हडसन ने तोड़ डाली। परंतु उसकी क्रूरता का समाधान इन शरणागत शहजादों को केवल गोलियांे से भूनकर नहीं हुआ। मृत्यु तक तो जंगली आदमी भी बदला लेते है। फिर सभ्य आदमी में और उनमें अंतर ही क्या रहा! इसलिए उन शहजादों के शवों को उठाकर दिल्ली की कोतवाली की ओर फेंका गया। गिद्धों को तैमूर के वंशजों की बढ़िया दावत देने
मुंह फेरा और तीन गोलियों से उसने उन तीनों शहजादों का मार डाला। तैमूर के वंशवृक्ष की वे अंतिम पŸिायां हडसन ने तोड़ डाली। परंतु उसकी क्रूरता का समाधान इन शरणागत शहजादों को केवल गोलियांे से भूनकर नहीं हुआ। मृत्यु तक तो जंगली आदमी भी बदला लेते है। फिर सभ्य आदमी में और उनमें अंतर ही क्या रहा! इसलिए उन शहजादों के शवों को उठाकर दिल्ली की कोतवाली की ओर फेंका गया। गिद्धों को तैमूर के वंशजों की बढ़िया दावत देने