1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के बााद उन सड़े शवों को खींचकर नदी में फेंक दिया गया। अकबर के वंशजों को दफनाने के लिए कोई भी न रहा! हे कालचक्र! तेरे कैसे-कैसे खेल हैं? अब सिखों को सचमुच लगने लगा कि उनके ग्रंथ में लिखा भविष्य सच हुआ। पर वह किस अर्थ में? किस तरह क्या फलित देकर?

फिर दिल्ली मंे भयानक कत्ल और लूट चालू हुई। उसका वर्णन सुनकर लाॅर्ड एलफिंस्टन जाॅन लाॅरेंस को लिखता है-‘‘दिल्ली का घेरा समाप्त हो जाने पर अपनी सेना ने दिल्ली


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के बााद उन सड़े शवों को खींचकर नदी में फेंक दिया गया। अकबर के वंशजों को दफनाने के लिए कोई भी न रहा! हे कालचक्र! तेरे कैसे-कैसे खेल हैं? अब सिखों को सचमुच लगने लगा कि उनके ग्रंथ में लिखा भविष्य सच हुआ। पर वह किस अर्थ में? किस तरह क्या फलित देकर?

फिर दिल्ली मंे भयानक कत्ल और लूट चालू हुई। उसका वर्णन सुनकर लाॅर्ड एलफिंस्टन जाॅन लाॅरेंस को लिखता है-‘‘दिल्ली का घेरा समाप्त हो जाने पर अपनी सेना ने दिल्ली


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