रक्त बिंदु गिरने तक इस शहर ने स्वदेश स्वतंत्रता के जेहाद को अलंकृत करे-ऐसे वीरता-प्रचुर, स्वार्थ-निवृŸिामय और उदारचरित्र कृत्य कुछ कम नहीं किए। नेता न होते, संगठन न होते, अंगे्रजों जैसा करते हुए शत्रु का सामना करते और विशेषकर असल फिरंगी तलवारों की तुलना में अपने ही कम-असल देशजों की तलवारें अपने प्राण लेने के लिए दिल्ली पर टूट पड़तीं-पहली बाधा से अनाथता, दूसरी से बिखराव, तीसरी से असह्यता और चैथी से उत्पन्न
रक्त बिंदु गिरने तक इस शहर ने स्वदेश स्वतंत्रता के जेहाद को अलंकृत करे-ऐसे वीरता-प्रचुर, स्वार्थ-निवृŸिामय और उदारचरित्र कृत्य कुछ कम नहीं किए। नेता न होते, संगठन न होते, अंगे्रजों जैसा करते हुए शत्रु का सामना करते और विशेषकर असल फिरंगी तलवारों की तुलना में अपने ही कम-असल देशजों की तलवारें अपने प्राण लेने के लिए दिल्ली पर टूट पड़तीं-पहली बाधा से अनाथता, दूसरी से बिखराव, तीसरी से असह्यता और चैथी से उत्पन्न