1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अंगद फिर लखनऊ आ गया। पीछे दिए वचन के अनुसार हैवलाॅक कितना पास आ गया है, यह अत्यंत उत्सुकता से अंगे्रज कमांडर जब उससे पूछने लगा तो अंगद ने हैवलाॅक का पत्र दिया। ‘‘और लगभग पच्चीस दिन मैं लखनऊ की ओर नहीं आ सकता!’’ आशा के बाद आई निराशा जैसा विष इस विश्व में कुद भी नहीं है। आज-कल में हैवलाॅक आएगा, इस उत्सुकता का यह दुर्भागी उŸार! मरते रोगी, अशक्त औरतें ही नहीं लड़ाके सोल्जर और अधिकार प्राप्त कमांडर-इन सबको भी बहुत खेद,


1411 of 2102

अंगद फिर लखनऊ आ गया। पीछे दिए वचन के अनुसार हैवलाॅक कितना पास आ गया है, यह अत्यंत उत्सुकता से अंगे्रज कमांडर जब उससे पूछने लगा तो अंगद ने हैवलाॅक का पत्र दिया। ‘‘और लगभग पच्चीस दिन मैं लखनऊ की ओर नहीं आ सकता!’’ आशा के बाद आई निराशा जैसा विष इस विश्व में कुद भी नहीं है। आज-कल में हैवलाॅक आएगा, इस उत्सुकता का यह दुर्भागी उŸार! मरते रोगी, अशक्त औरतें ही नहीं लड़ाके सोल्जर और अधिकार प्राप्त कमांडर-इन सबको भी बहुत खेद,


1411 of 2102