1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उदासीनता और भय हुआ। घिरी हुई सारी आंग्ल सेना पर मृत्यु की छाया पड़ने लगी। अन्न महंगा हो गया और सबको आधे पेट रहने का आदेश हुआ। लखनऊ की मुक्ति के महान् कार्य में भी हैवलाॅक जैसे योद्धा को यह विलंब क्यों करना पड़ रहा है।

लखनऊ में बंद अपने देश बंधुओं को मुक्त करने में क्षण भर का भी विलंब न लगे, इसलिए 29 जुलाई को ही हैवलाॅक कानपुर छोड़कर गंगा पार हो गया। उसके साथ डेढ़ हजार लोग और तेरह तोपें थी और इस सेना


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उदासीनता और भय हुआ। घिरी हुई सारी आंग्ल सेना पर मृत्यु की छाया पड़ने लगी। अन्न महंगा हो गया और सबको आधे पेट रहने का आदेश हुआ। लखनऊ की मुक्ति के महान् कार्य में भी हैवलाॅक जैसे योद्धा को यह विलंब क्यों करना पड़ रहा है।

लखनऊ में बंद अपने देश बंधुओं को मुक्त करने में क्षण भर का भी विलंब न लगे, इसलिए 29 जुलाई को ही हैवलाॅक कानपुर छोड़कर गंगा पार हो गया। उसके साथ डेढ़ हजार लोग और तेरह तोपें थी और इस सेना


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