1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जान की ंिचंता किए बिना और आई हुई नहीं कुमुक लेकर लखनऊ की ओर चला उसने बशीरगंज में विद्रोहियों से कुश्ती लड़ी, जहां से उसने उन्हें भगा दिया। फिर यह जय या पराजय? यह प्रश्न फिर सामने था। क्योंकि इस कुश्ती में हैवलाॅक के तीन सौ लोग मारे गए। ऐसी हड्डी नरम हुई कि लखनऊ की ओर आगे न बढ़ते हुए अंगे्रजी सेना पीछे गंगा की ओर हटती गई। उस दिन शाम को उसके साथ निकले डेढ़ हज़ार में से केवल साढ़े आठ सौ लोग ही बाकी रहे।

हैवलाॅक


1417 of 2102

जान की ंिचंता किए बिना और आई हुई नहीं कुमुक लेकर लखनऊ की ओर चला उसने बशीरगंज में विद्रोहियों से कुश्ती लड़ी, जहां से उसने उन्हें भगा दिया। फिर यह जय या पराजय? यह प्रश्न फिर सामने था। क्योंकि इस कुश्ती में हैवलाॅक के तीन सौ लोग मारे गए। ऐसी हड्डी नरम हुई कि लखनऊ की ओर आगे न बढ़ते हुए अंगे्रजी सेना पीछे गंगा की ओर हटती गई। उस दिन शाम को उसके साथ निकले डेढ़ हज़ार में से केवल साढ़े आठ सौ लोग ही बाकी रहे।

हैवलाॅक


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