अब हैवलाॅक ने भी ऐसा ही उदाŸा वर्तन किया। उसके सिर से भावी विजय का मुकुट छीन लिया गया तब भी दूसरे को श्रेय देनेवाली विजय के लिए वह पहले जैसा ही दिन-रात परिश्रम करने में जुट गया।’’
जिस विजय का सेहरा दूसरे के सिर बंधना है उस विजय के लिए केवल राष्ट्रीय कर्तव्य जान दिन-रात प्रयास करने में हैवलाॅक लगा था, तब ही दिनांक 15 सितंबर को सर जेम्स आउट्रम के हाथ नेतृत्व में आते ही उसने जो पहला आदेश जारी किया वह
अब हैवलाॅक ने भी ऐसा ही उदाŸा वर्तन किया। उसके सिर से भावी विजय का मुकुट छीन लिया गया तब भी दूसरे को श्रेय देनेवाली विजय के लिए वह पहले जैसा ही दिन-रात परिश्रम करने में जुट गया।’’
जिस विजय का सेहरा दूसरे के सिर बंधना है उस विजय के लिए केवल राष्ट्रीय कर्तव्य जान दिन-रात प्रयास करने में हैवलाॅक लगा था, तब ही दिनांक 15 सितंबर को सर जेम्स आउट्रम के हाथ नेतृत्व में आते ही उसने जो पहला आदेश जारी किया वह