1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

यह था-‘‘जिस वीर पुरूष ने लखनऊ मुक्त करने के लिए आज तक अप्रतिम शौर्य प्रकट किया है उस पुरूष को ही उसे मुक्त करने का सौभाग्य मिलना न्याय है, इसलिए अपने


1857 का स्वातंत्र्य समर - 295

सेनापतित्व के सारे अधिकार जनरल हैवलाॅक को सौंपकर लखनऊ मुक्त होने तक मैं स्वयंसेवक सिपाही बना रहूंगा।’’ कमांडर का यह पहला’ आदेश’ देखते ही उस अंगे्रजी सेना को कितनी नैतिक शिक्षा मिली होगी। व्यक्ति राष्ट्र में कैसे विलीन


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यह था-‘‘जिस वीर पुरूष ने लखनऊ मुक्त करने के लिए आज तक अप्रतिम शौर्य प्रकट किया है उस पुरूष को ही उसे मुक्त करने का सौभाग्य मिलना न्याय है, इसलिए अपने


1857 का स्वातंत्र्य समर - 295

सेनापतित्व के सारे अधिकार जनरल हैवलाॅक को सौंपकर लखनऊ मुक्त होने तक मैं स्वयंसेवक सिपाही बना रहूंगा।’’ कमांडर का यह पहला’ आदेश’ देखते ही उस अंगे्रजी सेना को कितनी नैतिक शिक्षा मिली होगी। व्यक्ति राष्ट्र में कैसे विलीन


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