‘पांच-छह दिन मंे लखनऊ मुक्त करने के लिए’ सितंबर की 20 तारीख को लखनऊ की मुक्ति के लिए फिर से गंगा उतरने लगी। 25 जुलाई का उतावले हैवलाॅक को पांच दिन में लखनऊ की ओर बढ़ना तो छोड़ो अवध में पैर जमाए रखना भी कठिन हो जाने से कानपुर लौट जानेवाला, 12 अगस्त का बदकिस्मत हैवलाॅक और अब 20 सितंबर का यह दृढ़ निश्चयी वीर आशा से भरा पूरा हैवलाॅक! हैवलाॅक के इन चित्रों मंे कितना अंतर था। उसके पस अब ढाई हजार से अधिक निडर
‘पांच-छह दिन मंे लखनऊ मुक्त करने के लिए’ सितंबर की 20 तारीख को लखनऊ की मुक्ति के लिए फिर से गंगा उतरने लगी। 25 जुलाई का उतावले हैवलाॅक को पांच दिन में लखनऊ की ओर बढ़ना तो छोड़ो अवध में पैर जमाए रखना भी कठिन हो जाने से कानपुर लौट जानेवाला, 12 अगस्त का बदकिस्मत हैवलाॅक और अब 20 सितंबर का यह दृढ़ निश्चयी वीर आशा से भरा पूरा हैवलाॅक! हैवलाॅक के इन चित्रों मंे कितना अंतर था। उसके पस अब ढाई हजार से अधिक निडर