1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जो भी खेत, जो भी नदी अपनी स्वतंत्रता के लिए रण में जूझी, उसपर अवध में घुसने लगी। लड़ाई के बाद लड़ाई करते और विद्रोहियों को आगे-आगे दौड़ते सितंबर की 23 तारीख को हैवलाॅक आलमबाग में आ पहुंचा। सारे दिन आलमबाग मंे विद्रोहियों से लड़ाई होती रही। उनकी पांच तोपें अंगे्रजों न छीन लीं। विद्रोहियों ने उनमें से एक तोप फिर छिन ली। दोनों ओर की ओर की सेना ने रणक्षेत्र मंे ही रात गुजारने का निश्चय किया। पर अंगे्रजी सेना


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जो भी खेत, जो भी नदी अपनी स्वतंत्रता के लिए रण में जूझी, उसपर अवध में घुसने लगी। लड़ाई के बाद लड़ाई करते और विद्रोहियों को आगे-आगे दौड़ते सितंबर की 23 तारीख को हैवलाॅक आलमबाग में आ पहुंचा। सारे दिन आलमबाग मंे विद्रोहियों से लड़ाई होती रही। उनकी पांच तोपें अंगे्रजों न छीन लीं। विद्रोहियों ने उनमें से एक तोप फिर छिन ली। दोनों ओर की ओर की सेना ने रणक्षेत्र मंे ही रात गुजारने का निश्चय किया। पर अंगे्रजी सेना


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