1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के कीचड़ और दलदल भरे मैदान में रात का विश्राम आरंभ करते ही विद्रोहियों ने विश्राम करना छोड़ फिर मारामारी शुरू कर दी। उस रात बरसात भी लगातार हो रही थी और वीरों के सिर जमीन पर से ऊपर उछल रहे थे। ऐसी स्थिति में भी उस अंगे्रजी सेना के उत्साह की लहरें इस बरसात की लहरों से अधिक जोर की गर्जना कर रही थीं। क्योंकि उसी रात दिल्ली जीत लेने की विद्युत् वार्Ÿाा आई थी। अंत में वह 25 तारीख का निर्णायक दिन उदित हुआ।


1440 of 2102

के कीचड़ और दलदल भरे मैदान में रात का विश्राम आरंभ करते ही विद्रोहियों ने विश्राम करना छोड़ फिर मारामारी शुरू कर दी। उस रात बरसात भी लगातार हो रही थी और वीरों के सिर जमीन पर से ऊपर उछल रहे थे। ऐसी स्थिति में भी उस अंगे्रजी सेना के उत्साह की लहरें इस बरसात की लहरों से अधिक जोर की गर्जना कर रही थीं। क्योंकि उसी रात दिल्ली जीत लेने की विद्युत् वार्Ÿाा आई थी। अंत में वह 25 तारीख का निर्णायक दिन उदित हुआ।


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