के कीचड़ और दलदल भरे मैदान में रात का विश्राम आरंभ करते ही विद्रोहियों ने विश्राम करना छोड़ फिर मारामारी शुरू कर दी। उस रात बरसात भी लगातार हो रही थी और वीरों के सिर जमीन पर से ऊपर उछल रहे थे। ऐसी स्थिति में भी उस अंगे्रजी सेना के उत्साह की लहरें इस बरसात की लहरों से अधिक जोर की गर्जना कर रही थीं। क्योंकि उसी रात दिल्ली जीत लेने की विद्युत् वार्Ÿाा आई थी। अंत में वह 25 तारीख का निर्णायक दिन उदित हुआ।
के कीचड़ और दलदल भरे मैदान में रात का विश्राम आरंभ करते ही विद्रोहियों ने विश्राम करना छोड़ फिर मारामारी शुरू कर दी। उस रात बरसात भी लगातार हो रही थी और वीरों के सिर जमीन पर से ऊपर उछल रहे थे। ऐसी स्थिति में भी उस अंगे्रजी सेना के उत्साह की लहरें इस बरसात की लहरों से अधिक जोर की गर्जना कर रही थीं। क्योंकि उसी रात दिल्ली जीत लेने की विद्युत् वार्Ÿाा आई थी। अंत में वह 25 तारीख का निर्णायक दिन उदित हुआ।