1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

को बाहर निकाला। उस अवसर का वर्णन वहां स्थित कैप्टन विल्सन की लेखनी ने किया है-‘‘रास्ते में कदम-कदम पर उनके आदमी मरते हुए भी गोरी सेना शहर से अपनी ओर आती देखते ही रेसीडेंसी के लोगों का सारा भय, सारी आशंकाएं छिप गई और उसकी जगह जय गर्जनाओं और आनंद की तालियों की सामने से आ रहे वीरों पर वर्षा होने लगी। अस्पताल से रोगी घिसटते बाहर आए और अपनी मुक्ति के लिए सामने से लड़ती आ रही अपनी शूर सेना को विजय स्वागत


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को बाहर निकाला। उस अवसर का वर्णन वहां स्थित कैप्टन विल्सन की लेखनी ने किया है-‘‘रास्ते में कदम-कदम पर उनके आदमी मरते हुए भी गोरी सेना शहर से अपनी ओर आती देखते ही रेसीडेंसी के लोगों का सारा भय, सारी आशंकाएं छिप गई और उसकी जगह जय गर्जनाओं और आनंद की तालियों की सामने से आ रहे वीरों पर वर्षा होने लगी। अस्पताल से रोगी घिसटते बाहर आए और अपनी मुक्ति के लिए सामने से लड़ती आ रही अपनी शूर सेना को विजय स्वागत


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