1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

से बुलाने लगे। जल्दी ही हमारी सेना हमें आकर मिली। वह अवसर अवर्णनीय है। जिन्होंने अपने पति मर गए हैं, यह सुना था-वे विधवाएं आकस्मिक पति-लाभ से सधवा होने लगीं और जिन्होंने अपने प्रियजनों से मिलने को आज चार माह से प्राण धारण किए हुए थे, उन्हें पहली बार ज्ञात हुआ कि अब उनके प्रियजनों के फिर मिलने की आशा नहीं है।’’

लखनऊ की रेसीडेंसी मंे आज तक सŸाासी दिन रात-दिन लड़ते इस अंगे्रजी


1857 का स्वातंत्र्य समर - 298


1452 of 2102

से बुलाने लगे। जल्दी ही हमारी सेना हमें आकर मिली। वह अवसर अवर्णनीय है। जिन्होंने अपने पति मर गए हैं, यह सुना था-वे विधवाएं आकस्मिक पति-लाभ से सधवा होने लगीं और जिन्होंने अपने प्रियजनों से मिलने को आज चार माह से प्राण धारण किए हुए थे, उन्हें पहली बार ज्ञात हुआ कि अब उनके प्रियजनों के फिर मिलने की आशा नहीं है।’’

लखनऊ की रेसीडेंसी मंे आज तक सŸाासी दिन रात-दिन लड़ते इस अंगे्रजी


1857 का स्वातंत्र्य समर - 298


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