फिर भी अंगे्रजों ने उन्हें सतारा की गद्दी। सन् 1674 में गागाभट्ट के हाथों अभिशिक्त और शिवाजी जिसपर विराजे थे, वह वही गद्दी को पहला बाजीराव अपनी विजय अर्पण कर मुजरा करता था यह वही सिंहासन था। महाराष्ट्र! देख, शिवाजी जिसपर बैठता था और संताजी, धनाजी, निराजी, बाजी-जिनके आगे ‘जी’ कहकर लोग नम्रता से झुकते थे तेरा वही सिंहासन डलहौजी ने टुकड़े-टुकड़े करके फेंक दिया। अब तू चाहे अर्जियां लिख या डेपुटेशन भेजता
फिर भी अंगे्रजों ने उन्हें सतारा की गद्दी। सन् 1674 में गागाभट्ट के हाथों अभिशिक्त और शिवाजी जिसपर विराजे थे, वह वही गद्दी को पहला बाजीराव अपनी विजय अर्पण कर मुजरा करता था यह वही सिंहासन था। महाराष्ट्र! देख, शिवाजी जिसपर बैठता था और संताजी, धनाजी, निराजी, बाजी-जिनके आगे ‘जी’ कहकर लोग नम्रता से झुकते थे तेरा वही सिंहासन डलहौजी ने टुकड़े-टुकड़े करके फेंक दिया। अब तू चाहे अर्जियां लिख या डेपुटेशन भेजता