1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

रह। डलहौजी नहीं सुनता तो फिर नहीं ही सुनता। इंग्लैंड में उसके वरिष्ठ अधिकारी तो जीवित हैं न? डलहौजी एक सामान्य आदमी है, पर उसके वे वरिष्ठ अधिकारी देवता भी हो सकते हैं? हमने उन्हें देखा ही कहां है? यह रंगों बापूजी बहुत बढ़िया और स्वामीभक्त व्यक्ति है-सतारा की शिकायत लेकर उसका इंग्लैंड जाना उचित है। कृपा की तो देव नहीं तो पत्थर! पर वे कृपा करते हैं या नहीं, इसकी बाट जोहता तू कितनी देर बैठेगा? कृपा अब होगी तब होगी, इस


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रह। डलहौजी नहीं सुनता तो फिर नहीं ही सुनता। इंग्लैंड में उसके वरिष्ठ अधिकारी तो जीवित हैं न? डलहौजी एक सामान्य आदमी है, पर उसके वे वरिष्ठ अधिकारी देवता भी हो सकते हैं? हमने उन्हें देखा ही कहां है? यह रंगों बापूजी बहुत बढ़िया और स्वामीभक्त व्यक्ति है-सतारा की शिकायत लेकर उसका इंग्लैंड जाना उचित है। कृपा की तो देव नहीं तो पत्थर! पर वे कृपा करते हैं या नहीं, इसकी बाट जोहता तू कितनी देर बैठेगा? कृपा अब होगी तब होगी, इस


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