1857 का स्वातंत्र्य समर - 50
आशा में रंगों बापूजी लंदन के लीडन हाॅल स्ट्रीट की सीढ़ियां कितनी बार चढ़े-उतरेंगे। अपमान होने तक-मजाक बनाएं जाने तक-करोड़ों रूपए अंगे्रज बैरिस्टरों की जेब में पहुचांने पर लौटने के लिए दमड़ी भी न बचने तक-और अंत में हम सतारा नहीं देंगे, ऐसा गर्वीला उत्तर मिलने तक रंगों बापूजी लंदन का मृगजल पीते रहें।
जब रंगों बापूजी लंदन जाने की तैयारी में लगे थे तब डलहौजी का ध्यान दूसरा
1857 का स्वातंत्र्य समर - 50
आशा में रंगों बापूजी लंदन के लीडन हाॅल स्ट्रीट की सीढ़ियां कितनी बार चढ़े-उतरेंगे। अपमान होने तक-मजाक बनाएं जाने तक-करोड़ों रूपए अंगे्रज बैरिस्टरों की जेब में पहुचांने पर लौटने के लिए दमड़ी भी न बचने तक-और अंत में हम सतारा नहीं देंगे, ऐसा गर्वीला उत्तर मिलने तक रंगों बापूजी लंदन का मृगजल पीते रहें।
जब रंगों बापूजी लंदन जाने की तैयारी में लगे थे तब डलहौजी का ध्यान दूसरा