रहा था। वेणुग्राम में जो कुलीन एवं सदाचार संपन्न परिवार थे उनमें माधवराव नारायण का परिवार मुख्य रूप से गिना जा सकता था। माधवराव नारायण और उनकी सुशील भार्या गंगाबाई का जोड़ा गृह-दरिद्रता से पीड़ित होकर भी परस्पर पे्रम के सुख में स्वयं को भाग्यवान समझता था। उस पवित्र परिवार के उस छोटे से घर में सन् 1824 में सबके मन और बदन उस समय उल्लास से खिल उठे जब साध्वी गंगाबाई ने पुत्र को जन्म दिया। वह सत्पुत्र और कोई नहीं,
रहा था। वेणुग्राम में जो कुलीन एवं सदाचार संपन्न परिवार थे उनमें माधवराव नारायण का परिवार मुख्य रूप से गिना जा सकता था। माधवराव नारायण और उनकी सुशील भार्या गंगाबाई का जोड़ा गृह-दरिद्रता से पीड़ित होकर भी परस्पर पे्रम के सुख में स्वयं को भाग्यवान समझता था। उस पवित्र परिवार के उस छोटे से घर में सन् 1824 में सबके मन और बदन उस समय उल्लास से खिल उठे जब साध्वी गंगाबाई ने पुत्र को जन्म दिया। वह सत्पुत्र और कोई नहीं,