श्रीमंत नाना साहब पेशवा ही थे जिनके नाम से अत्याचारी राजाओं की देह कांपने लगती थी और जिन्होंने स्वराज्य और स्वतंत्रता के लिए मर मिटनेवालों में अपना नाम अजर-अमर किया। जिस दिन यह भाग्यशाली बालक जनमा वह दिन कौन सा था, इसकी भी इतिहास को जानकारी नहीं। जिस दिन की जयंती मनानी चाहिए उस दिन की स्मृति इतिहास में न हो, यह बात कितनी उद्वेगकारी है! ऐसे दिन राष्ट्र के इतिहास में बहुत
1857 का स्वातंत्र्य समर - 53
श्रीमंत नाना साहब पेशवा ही थे जिनके नाम से अत्याचारी राजाओं की देह कांपने लगती थी और जिन्होंने स्वराज्य और स्वतंत्रता के लिए मर मिटनेवालों में अपना नाम अजर-अमर किया। जिस दिन यह भाग्यशाली बालक जनमा वह दिन कौन सा था, इसकी भी इतिहास को जानकारी नहीं। जिस दिन की जयंती मनानी चाहिए उस दिन की स्मृति इतिहास में न हो, यह बात कितनी उद्वेगकारी है! ऐसे दिन राष्ट्र के इतिहास में बहुत
1857 का स्वातंत्र्य समर - 53