1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



अधिक नहीं होते। हिंदुस्थान में गुलामी के गोबर में सड़ते हुए गोबर के कीड़ों को जन्म देनेवाले दिन लाखों उदय या अस्त होते हैं। परंतु अपनी ईश्वरदत्त स्वतंत्रता और स्वराज्य का अपहरण करनेवाले का रक्त-प्राशन करने के लिए तृशित, मानधन नाना साहब को जन्म देनेवाले दिन षताब्दियों में एक-दो ही होंगे। ऐसे अलभ्य दिन की यह अवमानना देखकर परमेष्वर ऐेसे अपात्र को फिर से दान नहीं करेगा, इसकी लज्जा महाराश्ट्र, तुझको होनी


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अधिक नहीं होते। हिंदुस्थान में गुलामी के गोबर में सड़ते हुए गोबर के कीड़ों को जन्म देनेवाले दिन लाखों उदय या अस्त होते हैं। परंतु अपनी ईश्वरदत्त स्वतंत्रता और स्वराज्य का अपहरण करनेवाले का रक्त-प्राशन करने के लिए तृशित, मानधन नाना साहब को जन्म देनेवाले दिन षताब्दियों में एक-दो ही होंगे। ऐसे अलभ्य दिन की यह अवमानना देखकर परमेष्वर ऐेसे अपात्र को फिर से दान नहीं करेगा, इसकी लज्जा महाराश्ट्र, तुझको होनी


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