1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

चाहिए। जिसने तेरे लिए और तेरे सम्मान के लिए रणांगण में अपना रक्त उड़ेला-उसकी जन्मतिथि तुम्हें ज्ञात न हो-और हाय-हाय! उसकी मृत्युतिथि भी तुझे ज्ञात न हो! तेरे स्वाभिमानी पुत्र कब जनमे, यह तुझे ज्ञात न हो और तेरे ही विष्वासघात के कारण कब मरे, यह भी तुझे ज्ञात न हो! इस अक्षम्य कृतघ्नता के लिए तुम्हारे लिए गुलामी की बेड़ियों का दंड ही उचित है! और वही तुम भोग भी रहे हो!

यह गुलामी की बेड़ी 8 लाख रूपयों मंे


203 of 2102

चाहिए। जिसने तेरे लिए और तेरे सम्मान के लिए रणांगण में अपना रक्त उड़ेला-उसकी जन्मतिथि तुम्हें ज्ञात न हो-और हाय-हाय! उसकी मृत्युतिथि भी तुझे ज्ञात न हो! तेरे स्वाभिमानी पुत्र कब जनमे, यह तुझे ज्ञात न हो और तेरे ही विष्वासघात के कारण कब मरे, यह भी तुझे ज्ञात न हो! इस अक्षम्य कृतघ्नता के लिए तुम्हारे लिए गुलामी की बेड़ियों का दंड ही उचित है! और वही तुम भोग भी रहे हो!

यह गुलामी की बेड़ी 8 लाख रूपयों मंे


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