की लड़ी हैं। इसने बड़गांव की संधि की और सबसे विषेश महत्त्व की बात यह कि अब षीघ्र ही अपवित्र स्पर्ष से इसके भ्रश्ट होने का अवसर आनेवाला है या आ ही गया है, यह सब तुझे मालूम है या नहीं? गद्दी का वारिस होने का अर्थ होता है उसके संरक्षण और सम्मान की रक्षा करना। फिर पेषवाओं की इस गद्दी के सम्मान की रक्षा करेगा या नहीं, या तो विजय का मुकुट इस गद्दी के सिर पर रखना पड़ेगा अन्यथा चितूर की मानिनी की तरह दीप्त चिता
की लड़ी हैं। इसने बड़गांव की संधि की और सबसे विषेश महत्त्व की बात यह कि अब षीघ्र ही अपवित्र स्पर्ष से इसके भ्रश्ट होने का अवसर आनेवाला है या आ ही गया है, यह सब तुझे मालूम है या नहीं? गद्दी का वारिस होने का अर्थ होता है उसके संरक्षण और सम्मान की रक्षा करना। फिर पेषवाओं की इस गद्दी के सम्मान की रक्षा करेगा या नहीं, या तो विजय का मुकुट इस गद्दी के सिर पर रखना पड़ेगा अन्यथा चितूर की मानिनी की तरह दीप्त चिता