का अधिकार नहीं है। अंगे्रज सरकार का कुछ प्रतिबिंब उनके द्वारा स्वयं लिखवाए गए पत्र में प्रतिबिंबित हुआ है। वे पूछते हैं-‘‘हमारे विख्यात राजवंष से आपका यह कृपण व्यवहार पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। हमारा विस्तृत राज्य और राज्य-षासन जब आपको श्रीमंत बाजीराव से प्राप्त हुआ त बवह ऐसे समझौते पर प्राप्त हुआ कि आप उसके मूल्य के रूप में 5 लाख रूपए प्रति वर्श दें। यह पेंषन यदि हमेषा रहनेवाली नहीं है तो उस पेंषन
का अधिकार नहीं है। अंगे्रज सरकार का कुछ प्रतिबिंब उनके द्वारा स्वयं लिखवाए गए पत्र में प्रतिबिंबित हुआ है। वे पूछते हैं-‘‘हमारे विख्यात राजवंष से आपका यह कृपण व्यवहार पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। हमारा विस्तृत राज्य और राज्य-षासन जब आपको श्रीमंत बाजीराव से प्राप्त हुआ त बवह ऐसे समझौते पर प्राप्त हुआ कि आप उसके मूल्य के रूप में 5 लाख रूपए प्रति वर्श दें। यह पेंषन यदि हमेषा रहनेवाली नहीं है तो उस पेंषन