जाने पर भी उन्हें अत्यंत आदर और प्रेम की भाशा में लिखे उनके प्रेमपत्र आते थे। हैवलाॅक की सेना ने जब ब्रह्यवर्त जीता तब उसे इंग्लैंड की अनेक भद्र महिलाओं द्वारा अपने ‘प्रिय अजीमुल्ला खान’ को भेजे पत्र देखने को मिले। अजीमुल्ला खान के प्रति महिलाओं के मन आकर्शित हो गए थे तो भी ईस्ट इंडिया कंपनी का मन उसकी ओर
1857 का स्वातंत्र्य समर - 57
आकर्षित न हुआ और उसने अनेक दिन चक्कर लगवाकर उन्हें साफ जवाब दिया
जाने पर भी उन्हें अत्यंत आदर और प्रेम की भाशा में लिखे उनके प्रेमपत्र आते थे। हैवलाॅक की सेना ने जब ब्रह्यवर्त जीता तब उसे इंग्लैंड की अनेक भद्र महिलाओं द्वारा अपने ‘प्रिय अजीमुल्ला खान’ को भेजे पत्र देखने को मिले। अजीमुल्ला खान के प्रति महिलाओं के मन आकर्शित हो गए थे तो भी ईस्ट इंडिया कंपनी का मन उसकी ओर
1857 का स्वातंत्र्य समर - 57
आकर्षित न हुआ और उसने अनेक दिन चक्कर लगवाकर उन्हें साफ जवाब दिया