1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

और कुल की महानता का उनके द्वारा भेजे गए आवेदन में बार-बार साभिमान उल्लेख हुआ है। मराठों के विस्तृत साम्राज्य का अधिपति होते हुए भी पेंशन के लिए दूसरों के दरवाजे पर निवेदन करने की


1857 का स्वातंत्र्य समर - 58

मजबूरी का उनको बहुत दुःख होता था। ‘संभावितस्य चाकीतिर्मरणादतिरिच्यते’ के अनुसार अकीर्ति की अपेक्षा मृत्यु का आलिंगन करनेवालों में से वे थे। उनका स्वभाव राजा जैसा उदार और शूरों जैसा स्वाभिमानी


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और कुल की महानता का उनके द्वारा भेजे गए आवेदन में बार-बार साभिमान उल्लेख हुआ है। मराठों के विस्तृत साम्राज्य का अधिपति होते हुए भी पेंशन के लिए दूसरों के दरवाजे पर निवेदन करने की


1857 का स्वातंत्र्य समर - 58

मजबूरी का उनको बहुत दुःख होता था। ‘संभावितस्य चाकीतिर्मरणादतिरिच्यते’ के अनुसार अकीर्ति की अपेक्षा मृत्यु का आलिंगन करनेवालों में से वे थे। उनका स्वभाव राजा जैसा उदार और शूरों जैसा स्वाभिमानी


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