है। सन् 1853 में उसके पति अचानक परलोक सिधार गए और उसके दत्तक प्रिय पुत्र दोमादर को उत्तराधिकारी के अधिकार न देते हुए अंगे्रज सरकार ने झांसी अधिगृहीत कर ली। परंतु ऐसी चिट्ठी-पत्री से अधिगृहीत होनेवाली वह रियासत नहीं थी। उस झांसी की रियासत पर नागपुर की बांका का राज्य नहीं था, वहां तो नाना की ‘छबीली’ बहन महारानी लक्ष्मीबाई राज्य कर रही थी। वह ऐसे अधिग्रहण की क्या परवाह करे! अंगे्रजों का यह कुटिल और जल्लादी कृत्य देखकर दुःख,
है। सन् 1853 में उसके पति अचानक परलोक सिधार गए और उसके दत्तक प्रिय पुत्र दोमादर को उत्तराधिकारी के अधिकार न देते हुए अंगे्रज सरकार ने झांसी अधिगृहीत कर ली। परंतु ऐसी चिट्ठी-पत्री से अधिगृहीत होनेवाली वह रियासत नहीं थी। उस झांसी की रियासत पर नागपुर की बांका का राज्य नहीं था, वहां तो नाना की ‘छबीली’ बहन महारानी लक्ष्मीबाई राज्य कर रही थी। वह ऐसे अधिग्रहण की क्या परवाह करे! अंगे्रजों का यह कुटिल और जल्लादी कृत्य देखकर दुःख,