1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

की गद्दी कैसे पूरी पड़ेगी! तदर्थ उस गद्दी के साथ ही नागपुर के सारे भवन, हाथी-घोड़े, राजा-रानियां, रानियां के अलंकार, आक्रोष, चिल्लाहट-जो भी मिले वह सब जल्दी जाओ! यह अग्नि भभक रही है, इसलिए पूरा नागपुर धकेल दो उसमें!

अब हवनकुंड सच में जाज्वल्य दिखने लगा है। ऐसे समय उतनी ही जाज्वल्य हवि चाहिए। पर ऐसी आग से भी तेजस्विनी हवि ब्रह्यवर्त के मुकुट को उसमें धकेलो! राष्ट्र-क्षोभ के न्याय देव! ‘प्रतिशोध’ को


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की गद्दी कैसे पूरी पड़ेगी! तदर्थ उस गद्दी के साथ ही नागपुर के सारे भवन, हाथी-घोड़े, राजा-रानियां, रानियां के अलंकार, आक्रोष, चिल्लाहट-जो भी मिले वह सब जल्दी जाओ! यह अग्नि भभक रही है, इसलिए पूरा नागपुर धकेल दो उसमें!

अब हवनकुंड सच में जाज्वल्य दिखने लगा है। ऐसे समय उतनी ही जाज्वल्य हवि चाहिए। पर ऐसी आग से भी तेजस्विनी हवि ब्रह्यवर्त के मुकुट को उसमें धकेलो! राष्ट्र-क्षोभ के न्याय देव! ‘प्रतिशोध’ को


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