1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

प्रसन्न करने के लिए नई हवि ऐसी चुनो कि बस! यह मान उसी का। इस नीति होत्र की ज्वाला आकाश छूने लगे, इसलिए यह झांसी की बिजली धकेलो उसमें!

देखो, देखो, इस दिव्य हवनकंुड से सारे पापी दुर्योधनों के शरीर कांपने लगे हैं, इसलिए प्रतिशोध का सिर ऊपर दिखने लगा है। ऐसे समय आविर्भूत होने को तत्पर उस देवता को पूर्ण संतुष्ट करने के लिए हवनों का आक्रमण होना चाहिए। इसलिए चलो, ये हैं अर्काट के नवाब, धकेलो इन्हें!

तंजावुर की गद्दी, धकेलो उसमें!


277 of 2102

प्रसन्न करने के लिए नई हवि ऐसी चुनो कि बस! यह मान उसी का। इस नीति होत्र की ज्वाला आकाश छूने लगे, इसलिए यह झांसी की बिजली धकेलो उसमें!

देखो, देखो, इस दिव्य हवनकंुड से सारे पापी दुर्योधनों के शरीर कांपने लगे हैं, इसलिए प्रतिशोध का सिर ऊपर दिखने लगा है। ऐसे समय आविर्भूत होने को तत्पर उस देवता को पूर्ण संतुष्ट करने के लिए हवनों का आक्रमण होना चाहिए। इसलिए चलो, ये हैं अर्काट के नवाब, धकेलो इन्हें!

तंजावुर की गद्दी, धकेलो उसमें!


277 of 2102