जबड़े में सारा जगत् ही पिस जाएगा। परंतु उस जबड़े की धार जब तक अधिक तेज न हो जाए तब तक ठहरना उपयोगी नहीं। इसलिए दिल्ली के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 69
राजमहलों को ताले लगा और वहां के मयुरासन पर बैठनेवाले अकबर के वंशज को खींचकर धकेलो उसमें!
अवध प्रांत के बड़े-बड़े तालुकेदार क्या कर रहे हैं? उनकी सारी जमीनें और उनके सारे हक छीनकर उन्हें जंगली पशुओं जैसा घेरकर लाओ इधर! वैसे ही बंबई प्रात के (इनाम कमीशन
जबड़े में सारा जगत् ही पिस जाएगा। परंतु उस जबड़े की धार जब तक अधिक तेज न हो जाए तब तक ठहरना उपयोगी नहीं। इसलिए दिल्ली के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 69
राजमहलों को ताले लगा और वहां के मयुरासन पर बैठनेवाले अकबर के वंशज को खींचकर धकेलो उसमें!
अवध प्रांत के बड़े-बड़े तालुकेदार क्या कर रहे हैं? उनकी सारी जमीनें और उनके सारे हक छीनकर उन्हें जंगली पशुओं जैसा घेरकर लाओ इधर! वैसे ही बंबई प्रात के (इनाम कमीशन