1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जबड़े में सारा जगत् ही पिस जाएगा। परंतु उस जबड़े की धार जब तक अधिक तेज न हो जाए तब तक ठहरना उपयोगी नहीं। इसलिए दिल्ली के


1857 का स्वातंत्र्य समर - 69

राजमहलों को ताले लगा और वहां के मयुरासन पर बैठनेवाले अकबर के वंशज को खींचकर धकेलो उसमें!

अवध प्रांत के बड़े-बड़े तालुकेदार क्या कर रहे हैं? उनकी सारी जमीनें और उनके सारे हक छीनकर उन्हें जंगली पशुओं जैसा घेरकर लाओ इधर! वैसे ही बंबई प्रात के (इनाम कमीशन


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जबड़े में सारा जगत् ही पिस जाएगा। परंतु उस जबड़े की धार जब तक अधिक तेज न हो जाए तब तक ठहरना उपयोगी नहीं। इसलिए दिल्ली के


1857 का स्वातंत्र्य समर - 69

राजमहलों को ताले लगा और वहां के मयुरासन पर बैठनेवाले अकबर के वंशज को खींचकर धकेलो उसमें!

अवध प्रांत के बड़े-बड़े तालुकेदार क्या कर रहे हैं? उनकी सारी जमीनें और उनके सारे हक छीनकर उन्हें जंगली पशुओं जैसा घेरकर लाओ इधर! वैसे ही बंबई प्रात के (इनाम कमीशन


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