आदि के द्वारा) हजारों हकदारों के हक फेंक-फांककर उन्हें भी लाओ इधर! हवनकुंड प्रज्वलित हैं। इसलिए जमींदार, जागीरदार, तालुकेदार, वतनदार आदि सारे दारों को कंगाल कर धकेलो उसमें!
राजा, महाराजा, बादशाह, प्रधान, नवाब, वजीर जैसी उत्तम हवियां इस हवन कुंड में पड़ें और हमारे राष्ट्र-क्षोभ ‘कुलदेव’ को प्रसन्न करें! हमारी यह वर्तमान दुर्दशा और गुलामी देखकर हमारे पूर्वजों की आंखों से बहनेवाले आंसु उस देवता को अच्छी
आदि के द्वारा) हजारों हकदारों के हक फेंक-फांककर उन्हें भी लाओ इधर! हवनकुंड प्रज्वलित हैं। इसलिए जमींदार, जागीरदार, तालुकेदार, वतनदार आदि सारे दारों को कंगाल कर धकेलो उसमें!
राजा, महाराजा, बादशाह, प्रधान, नवाब, वजीर जैसी उत्तम हवियां इस हवन कुंड में पड़ें और हमारे राष्ट्र-क्षोभ ‘कुलदेव’ को प्रसन्न करें! हमारी यह वर्तमान दुर्दशा और गुलामी देखकर हमारे पूर्वजों की आंखों से बहनेवाले आंसु उस देवता को अच्छी