जिसके नेत्रों से निकलनेवाली ज्वालाएं अत्याचारों की काली कोठरियों को जलाकर भस्म करती हैं और जिसकी लपलपाती तप्त जिह्य हजारों दुःशासनों का रक्त गटागट पीती है उस भयंकर, उग्र एवं भयानक राष्ट्रीय प्रतिशोध को शतशः प्रणाम-
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु संदृश्यन्ते चूर्णितैरूत्तमाड् गेः
हे हिदंभूमि! अंततः इस महायज्ञ से तेरा ‘प्रतिशोध’ सभी में मर्तिमंत
जिसके नेत्रों से निकलनेवाली ज्वालाएं अत्याचारों की काली कोठरियों को जलाकर भस्म करती हैं और जिसकी लपलपाती तप्त जिह्य हजारों दुःशासनों का रक्त गटागट पीती है उस भयंकर, उग्र एवं भयानक राष्ट्रीय प्रतिशोध को शतशः प्रणाम-
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु संदृश्यन्ते चूर्णितैरूत्तमाड् गेः
हे हिदंभूमि! अंततः इस महायज्ञ से तेरा ‘प्रतिशोध’ सभी में मर्तिमंत