गई सरकारी रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है। स्वयं कमांडर-इन-चीफ को यह बात ज्ञात थी। ऐसा होते हुए भी हिंदुस्थानी सिपाहियों को वे कारतूस देकर उनके पवित्र धर्म को भ्रष्ट करने का अधम कृत्य निरंतर चालू रखा गया था। अंगे्रजों के मन के इस विश्वासघात की कल्पना सन् 1853 में भारतीय सिपाहियों को बिल्कुल भी न थी, अतः उन्होंने इन कारतूसों का प्रयोग बिना किसी शंका के किया। इस तरह अपनी कपट भरी योजना सफल होते
गई सरकारी रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है। स्वयं कमांडर-इन-चीफ को यह बात ज्ञात थी। ऐसा होते हुए भी हिंदुस्थानी सिपाहियों को वे कारतूस देकर उनके पवित्र धर्म को भ्रष्ट करने का अधम कृत्य निरंतर चालू रखा गया था। अंगे्रजों के मन के इस विश्वासघात की कल्पना सन् 1853 में भारतीय सिपाहियों को बिल्कुल भी न थी, अतः उन्होंने इन कारतूसों का प्रयोग बिना किसी शंका के किया। इस तरह अपनी कपट भरी योजना सफल होते