1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

रहा था। कमांडर-इन-चीफ को चरबी की बात मालूम होते हुए भी उसने क्योंकर हिंदुओं के मुंह में गाय का मांस एवं मुसलमानों के मुंह में सूअर का मांस ठूंसा? इस एक व्यवहार में अंगे्रजी सरकार ने कितनी बार सफेद झूठ बोला, यह देखें तो रक्त की हर बंूद खौलने लगती है। कारतूस को गाय और सूअर की चरबी लगाई जाती है, इस अफवाह पर सिपाहियों ने अंधविश्वास किया, ऐसा कहनेवाले निर्लज्ज लोग, दमदम कारखाने में जो ठेकेदार


1857 का स्वातंत्र्य समर - 75


306 of 2102

रहा था। कमांडर-इन-चीफ को चरबी की बात मालूम होते हुए भी उसने क्योंकर हिंदुओं के मुंह में गाय का मांस एवं मुसलमानों के मुंह में सूअर का मांस ठूंसा? इस एक व्यवहार में अंगे्रजी सरकार ने कितनी बार सफेद झूठ बोला, यह देखें तो रक्त की हर बंूद खौलने लगती है। कारतूस को गाय और सूअर की चरबी लगाई जाती है, इस अफवाह पर सिपाहियों ने अंधविश्वास किया, ऐसा कहनेवाले निर्लज्ज लोग, दमदम कारखाने में जो ठेकेदार


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