चरबी देता था उसका करार पत्र अवश्य देखें, जिससे इसका स्पष्ट उत्तर मिलेगा कि उन कारतूसों में गाये की चरबी का उपयोग किया जाता था या नहीं। हिंदू लोग जिसे मां मानते हैं उस गाय की चरबी की आपूर्ति दो आने की एक पौंड की दर से की जाती थी और उस चरबी में सुअर की चरबी का अंश मिलाया जाता था, यह भी असंभव नहीं है। इन कारतूसों का हल्ला होते ही सन् 1857 की 29 जनवरी को एक सरक्यूलर भेजा गया था। उसमें से सरकारी हुकूमत
चरबी देता था उसका करार पत्र अवश्य देखें, जिससे इसका स्पष्ट उत्तर मिलेगा कि उन कारतूसों में गाये की चरबी का उपयोग किया जाता था या नहीं। हिंदू लोग जिसे मां मानते हैं उस गाय की चरबी की आपूर्ति दो आने की एक पौंड की दर से की जाती थी और उस चरबी में सुअर की चरबी का अंश मिलाया जाता था, यह भी असंभव नहीं है। इन कारतूसों का हल्ला होते ही सन् 1857 की 29 जनवरी को एक सरक्यूलर भेजा गया था। उसमें से सरकारी हुकूमत