1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

कहती-‘‘नेटिव सिपाहियों के लिए बननेवाले कारतूसों को केवल बकरी या बकरे की चरबी लगाई जाए, सूअर या गाय की चरबी बिल्कुल काम में न ली जाए।’’ जल्दबाजी में निकाले गए सरक्यूलर से यही सिद्धह होता है कि गाय या सूअर की चरबी न लगाने का इसके पहले नियम नहीं था। दमदम और मेरठ में इन कारतूसों के कारखाने थे। दमदम के कारखाने में काम करनेवाले एक महतर ने एक ब्राह्यण के ऐसा कहते ही वह मेहतर बोला, ‘‘अब सब ओर भ्रष्टता फैलेगी।


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कहती-‘‘नेटिव सिपाहियों के लिए बननेवाले कारतूसों को केवल बकरी या बकरे की चरबी लगाई जाए, सूअर या गाय की चरबी बिल्कुल काम में न ली जाए।’’ जल्दबाजी में निकाले गए सरक्यूलर से यही सिद्धह होता है कि गाय या सूअर की चरबी न लगाने का इसके पहले नियम नहीं था। दमदम और मेरठ में इन कारतूसों के कारखाने थे। दमदम के कारखाने में काम करनेवाले एक महतर ने एक ब्राह्यण के ऐसा कहते ही वह मेहतर बोला, ‘‘अब सब ओर भ्रष्टता फैलेगी।


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