युद्ध के बिना कभी नहीं मिलेगा। धर्मरक्षा के लिए जो स्वराज्य-संपादन नहीं करता वह महाराष्ट्र धर्म का असल मराठा नहीं और जो महाराष्ट्र धर्म का असल मराठा है वह, स्वराज्य-संपादन का जो एकमात्र मार्ग है उस समर-मार्ग में कूदने से कभी भी पीछे हटनेवाला नहीं। एतदर्थ युद्धाएं युज्यस्व-श्री छत्रपति द्वारा प्रांरभ किए गए स्वतंत्रता यज्ञ के होता का कंकण बांधने जो हाथ आगे आता है वह हमेशा ही धन्य है।
हतो वा प्राप्यसि स्वर्ग जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्!
युद्ध के बिना कभी नहीं मिलेगा। धर्मरक्षा के लिए जो स्वराज्य-संपादन नहीं करता वह महाराष्ट्र धर्म का असल मराठा नहीं और जो महाराष्ट्र धर्म का असल मराठा है वह, स्वराज्य-संपादन का जो एकमात्र मार्ग है उस समर-मार्ग में कूदने से कभी भी पीछे हटनेवाला नहीं। एतदर्थ युद्धाएं युज्यस्व-श्री छत्रपति द्वारा प्रांरभ किए गए स्वतंत्रता यज्ञ के होता का कंकण बांधने जो हाथ आगे आता है वह हमेशा ही धन्य है।
हतो वा प्राप्यसि स्वर्ग जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्!